यहाँ एक कविता:

बादल की गोद में

सिमट आया आकाश, काला और गहरा
बूँदें गिरीं, धरती पर एक नाच सजाया

पत्तों पर थरथराती हल्की पुकार
छत पर छम-छम की एक मधुर संगत

भीग रही हैं डाลें, गीली हरियाली
मन में एक अजीब सी शांति बसती