लहरें बेचैन, समुद्र अनंत
चंचल तरंगें, नीले आकाश में उछलती
क्षण भर में उठती, क्षण में मिलती
गर्जन करती लहरें, क्रोध में आसमान को चीरती
किनारे पर पड़ती, फेन बिखेरती
समुद्र की गोद में, एक अनंत संगीत
कभी मधुर, कभी तीव्र, कभी अतृप्त
लहरें बेचैन, समुद्र अनंत
चंचल तरंगें, नीले आकाश में उछलती
क्षण भर में उठती, क्षण में मिलती
गर्जन करती लहरें, क्रोध में आसमान को चीरती
किनारे पर पड़ती, फेन बिखेरती
समुद्र की गोद में, एक अनंत संगीत
कभी मधुर, कभी तीव्र, कभी अतृप्त