निःशब्द कमरे में
मेरी परछाईं भी हुई परदेसी
सन्नाटे के कोने में
एक अकेला सपना रोता है
दीवारें सिर्फ मौन गवाह
मेरी खामोशी के
कभी-कभी हवा में
अनसुनी सिसकियाँ भी उठतीं
निःशब्द कमरे में
मेरी परछाईं भी हुई परदेसी
सन्नाटे के कोने में
एक अकेला सपना रोता है
दीवारें सिर्फ मौन गवाह
मेरी खामोशी के
कभी-कभी हवा में
अनसुनी सिसकियाँ भी उठतीं