सुबह की चाय
उजाले में डूबी खिड़की,
भाप उठती प्याले से
चुस्की भर में छिपा है संसार
मधुर, गर्म, सरल स्वाद
चाय की लहर में बहती स्मृतियाँ
पुरानी, नई, अधूरी
एक घूँट, फिर एक घूँट
जैसे जीवन का रस पी रही हूँ
सुबह की चाय
उजाले में डूबी खिड़की,
भाप उठती प्याले से
चुस्की भर में छिपा है संसार
मधुर, गर्म, सरल स्वाद
चाय की लहर में बहती स्मृतियाँ
पुरानी, नई, अधूरी
एक घूँट, फिर एक घूँट
जैसे जीवन का रस पी रही हूँ