यहाँ एक कविता है:

हरी-हरी घास पर मोर नाचता
पत्तों में हवा के संग गाता

पहाड़ों की गोद में बहती नदी
चमकती धार, निर्मल और अबोधी

बादल छाए, रंग-बिरंगे फूल
प्रकृति का यह अनमोल है जूल

मौसम बदले, रूप बदले अनोखे
हर पल नया, हर दृश्य है रोके