यहाँ एक कविता है:

शहर की रोशनी

चमकती खिड़कियाँ, जगमगाते बुलेवार्ड
हर कोने में बिखरी हुई चाँदनी
रात के आँचल में जुगनू की तरह
नियॉन बोर्ड की मुस्कान

सड़कें हैं जैसे तार-ए-तब्दीली
हर लाइट एक कहानी कहती
सपनों के रंग बिखेरती हुई
शहर की रोशनी बेताल