यहाँ एक कविता है:

तुम्हारी याद के सागर में

सांझ की धुंध में तुम्हारी परछाईं
छू जाती है मेरी अधूरी सांसों को
प्रेम के इस अनंत समंदर में
डूबती-उभरती मेरी भावनाएं

दूर होकर भी कितने पास हो
हर सांस में तुम्हारी महक बसी
विरह की व्यथा में भी मुस्कुराता
मेरा यह अटूट प्रेम, अनमोल रिश्ता