तू दूर, मैं यहाँ
सिर्फ एक पुल सा झूलता
तेरी यादों का पुल
कभी मजबूत, कभी कमजोर
हर पल मेरी आँखों में तेरा चेहरा
दूरियाँ बढ़ती जाती हैं
पर प्रेम सिकुड़ता नहीं
तू मेरे दिल में बसा है
जैसे शब्दों में कविता
तू दूर, मैं यहाँ
सिर्फ एक पुल सा झूलता
तेरी यादों का पुल
कभी मजबूत, कभी कमजोर
हर पल मेरी आँखों में तेरा चेहरा
दूरियाँ बढ़ती जाती हैं
पर प्रेम सिकुड़ता नहीं
तू मेरे दिल में बसा है
जैसे शब्दों में कविता