बादल की गोद में
बूँदें चुपके से गिरती हैं
खिड़की पर ठिठुरती हैं
पत्तों पर थाप, मिट्टी में सुर
एक अनकही सी मधुर पुकार
हरियाली चमक उठी
मन की प्यास भी भर उठी
नम हवा में कुछ यादें
कुछ सपने, कुछ आवाजें
बारिश के इन पलों में
जैसे जीवन फिर से मिलता है
बादल की गोद में
बूँदें चुपके से गिरती हैं
खिड़की पर ठिठुरती हैं
पत्तों पर थाप, मिट्टी में सुर
एक अनकही सी मधुर पुकार
हरियाली चमक उठी
मन की प्यास भी भर उठी
नम हवा में कुछ यादें
कुछ सपने, कुछ आवाजें
बारिश के इन पलों में
जैसे जीवन फिर से मिलता है