यहाँ एक कविता है:

सुबह की चाय

उजाले की पहली चुस्की में
मेरी प्याली में उमंग उफनती है

भाप सी उठती, सुर्ख किनारों पर
एक मीठा संगीत बजता है

चुस्की दर चुस्की, क्षण-क्षण जैसे
जागते हुए सपने सजाती है

गर्म चाय में डूबी उँगलियाँ
दिन की शुरुआत मुस्कुराती है