दूरियाँ
तेरी याद में बैठी हूँ
खिड़की पर टेक कर
हर पल तुझे ढूँढती
हर सांस में तेरा स्पर्श भरती
दिल की डगर पर
बिखरे हुए तेरे ख्याल
कभी मुस्कुराते, कभी रोते
प्रेम के अधूरे सवाल
दूरियाँ
तेरी याद में बैठी हूँ
खिड़की पर टेक कर
हर पल तुझे ढूँढती
हर सांस में तेरा स्पर्श भरती
दिल की डगर पर
बिखरे हुए तेरे ख्याल
कभी मुस्कुराते, कभी रोते
प्रेम के अधूरे सवाल