शहर की रोशनी
चमकते तारों सी बिखरी रोशनियाँ
सजी हुई हैं सड़कें रंग-बिरंगी
नीऑन बोर्ड चमक रहे विज्ञापनों में
जैसे कहते हों अपनी अधूरी कहानी
दूर क्षितिज पर जगमग जगमग
बहुमंजिले इमारतें खड़ी हैं
हर खिड़की में एक अलग संसार
कभी मौन, कभी शोर से भरा
रात के आँचल में जगी हुई आँखें
शहर की रोशनी में खोई हुई