सुबह की चाय
उबलते पानी में डूबी पत्तियाँ
मचलती सुरसों के साथ
एक पतीली में उमंग भरी
चाय बनती है हर बार अलग
धुंधली सी सुबह में
भाप उठती कप से
मीठी इलायची की महक
सजाती मेरी रसोई को
चुस्की भर में छिपा है
एक पूरा संसार
थोड़ा किस्सा, थोड़ी याद
थोड़ी अपनी बहार