यहाँ एक कविता है:

बादल की गोद में

छाता खोल आसमान ने
बूँदें गिराई धरती पर
कोमल स्पर्श में भीग रही
हर पत्ती, हर डाली डरी

सड़कों पर पानी की रेखाएं
चलती पलकों में झूमती
कुछ यादें, कुछ सपने बहे
मन की खामोश धुन गुनगुनाती

गीली मिट्टी की महक में
कुछ अधूरी कहानियाँ छुपी
बारिश के इन पलों में
जैसे जीवन फिर से मिली