यहाँ एक कविता है:

तुम्हारी याद के सागर में

तुम्हारी याद के सागर में डूबा रहता हूँ
हर पल, हर श्वास में तुम्हें महसूस करता हूँ

दूरियाँ बढ़ती हैं, पर प्रेम सिकुड़ता नहीं
तुम्हारी आँखों का जादू कभी मिटता नहीं

बिखरे हुए पल, बिंदु-बिंदु स्मृतियाँ
हृदय में जैसे छुपी हुई एक मधुर कहानियाँ

चाहता हूँ तुम्हें अपने पास बुला लूँ
पर विरह की डोर में ही सिमट जाता हूँ