यहाँ एक कविता है "अकेलापन" पर:

शब्द नहीं, सन्नाटा बोलता है
मेरा अकेलापन खामोशी में डोलता है

कमरे की दीवारें साक्षी हैं मेरी
हर चुप्पी में एक कहानी डुबोता है

बिखरे हुए सपने, टूटी हुई आवाज़
एक अजनबी सी पीड़ा मुझको घेरता है

किसी की याद, किसी की धुन में
अकेला मन अपनी धुन में बहता है