यहाँ एक कविता है "अकेलापन" विषय पर:

शून्य कमरे में बैठा हूँ

मौन की दीवारें घेरे हुए
सन्नाटा सांसों में भरे हुए

कभी किसी का फोन नहीं आता
कभी किसी का संदेश नहीं मिलता

अकेलेपन की चादर ओढ़े
मन के आँगन में खड़ा हूँ