यहाँ एक कविता है "अकेलापन" विषय पर:

शून्य कमरे में मेरी परछाईं
एकमात्र साथी, मौन की चाह

सिर्फ दीवारें, कुर्सी और मेज
कोई नहीं जो पूछे मेरी बात

आँखों में छुपी अनकही व्यथा
मन की गहराई में डूबता ख्याल

किसका इंतज़ार, किससे मिलना
अकेलापन बना मेरा हमसफ़र