अतीत के खंडहर
धूल भरी राहों पर बिखरी यादें
चुपके से फुसफुसाती हैं मीठी बातें
कभी हँसी थी, कभी आँसू थे बहे
वो पुरानी तस्वीरें अब भी मुस्कुराते हैं
समय की धारा में बहते हुए भी
कुछ लम्हे अटक गए हैं मन में गहरे
स्मृतियाँ हैं जैसे पुराने गीत
जो धीरे-धीरे फिर से सजते हैं