यहाँ एक कविता है:

आशा की किरण

जैसे सुबह की पहली धूप,
चमकती मेरी आँखों में नूर
सपनों के पंख लगाए हुए
उड़ रहा हर पल, हर ठौर

कल की राहें अभी अनजान
पर विश्वास है अटल, अमर
हर चुनौती को चीर के मैं
बढ़ूँगा आगे, हर बार मजबूत और

कभी गिरूँगा, कभी उठूँगा
पर हार नहीं मानूँगा कभी
आशा मेरी है ज्योति समान
जलती रहेगी, हर संध्या और हर सवेरे