यहाँ एक कविता है बारिश के दिनों पर:

बादल की गोद में छुपी आँखें

छत पर टप-टप बूँदें गिरतीं
मन की पुरानी धुन फिर मचलती
कागज़ की नाव सपने बुनती
हरी दूब पर नाचती रहती

बारिश के संगीत में खोई
एक पुरानी याद मुस्कुराती
भीगी हुई ये पलकें चुपके से
मेरी आत्मा को छू जाती