यहाँ एक कविता है बारिश के दिन पर:

बादल की फुसफुसाहट

बादल मेरी छत पर टप-टप गाते हैं
पुरानी यादों के तार छेड़ जाते हैं

भीगी धरती की सुगंध में खोया मन
बचपन के किस्से फिर से जगाते हैं

कागज़ की नाव सजाता हूँ खिड़की पर
बारिश के संगीत में खो जाता हूँ मैं