यहाँ एक कविता है "बारिश के दिन" पर:

बादल छाए, रिमझिम आई
धरती की प्यास बुझाई

पत्तों पर मीठी थाप सी
हर कोना हरा-भरा छाई

बूँदें झूमती, नाचती हुई
मन में एक तरंग समाई

खिड़की से झाँकती बारिश
मेरी आँखों में छा गई