बादल छाए, रिमझिम आई
धरती की प्यास बुझाई
पत्तों पर मीठी थाप सी
हर कोना हरा-भरा छाई
बूँदें झूमती, नाचती हुई
मन में एक तरंग समाई
खिड़की से झाँकती बारिश
मेरी आँखों में छा गई
बादल छाए, रिमझिम आई
धरती की प्यास बुझाई
पत्तों पर मीठी थाप सी
हर कोना हरा-भरा छाई
बूँदें झूमती, नाचती हुई
मन में एक तरंग समाई
खिड़की से झाँकती बारिश
मेरी आँखों में छा गई