बादल की गोद में छुपी धरती
कुछ मौन, कुछ मुस्कुराती
बूँदें गिरती, छम-छम करती
पत्तों पर नाचती जाती
हरियाली का गीत सजाती
मन में एक नई उमंग भरती
सिली-सिली महक उठी
पृथ्वी अपनी प्यास भुलाती
बादल की गोद में छुपी धरती
कुछ मौन, कुछ मुस्कुराती
बूँदें गिरती, छम-छम करती
पत्तों पर नाचती जाती
हरियाली का गीत सजाती
मन में एक नई उमंग भरती
सिली-सिली महक उठी
पृथ्वी अपनी प्यास भुलाती