यहाँ एक कविता है बारिश के दिनों पर:

बादल की गोद में
छुपी हुई आँखें मेरी

बूँदें गिरती हैं
सड़कों पर नाचती हुई

मन की धारा में
भीग रही है याद़ें

शांत सी खामोशी
बरसात के संगीत में