बादल की गोद में
झरने लगे बूँदें, मुलायम और शीतल
धरती की प्यास बुझाती हुई चंचल
पत्तों पर थिरकती, छत पर टपकती
एक संगीत अनोखा, मन को मोहती
भीगी सड़कें, तर जाते मैदान
हरियाली में रंग भरे, जैसे नया सावन
कागज की नाव पर सपने सजाते
बचपन के पल, फिर से याद आते