यहाँ एक कविता है बारिश के दिनों पर:

बादल की गोद में
रिमझिम की थाप

नन्हीं बूँदें झूमती
धरती पर नाचती

पत्तों पर थरथराती
मोर की पुकार

भीगी हुई सड़कें
मन में नई उमंग