यहाँ एक कविता है बारिश के दिनों पर:

बादल की गोद में छुपी धरती

बूँदें गिरती, मन में उमंग भरती
सड़कें चमकीं, पत्ते हँसे हरे
बारिश के संगीत में डूबे घरे

कागज की नाव सजी खिड़की पर
बचपन के सपने उड़ते हवा पर
भीग गई स्मृतियाँ, मुस्कुराती हुई
एक पुरानी धुन फिर से गाती हुई