बादल की गोद में
बादल छाए, आँखें भीगी
धरती की प्यास बुझी नई
बूँदें गिरती, संगीत बनती
हर कतरा एक कहानी कही
पत्तों पर थिरकती बारिश
पंछी शरण में, पंख सिकोड़े
मोर नाचे, मिट्टी महकी
प्रकृति का श्रृंगार निचोड़े
मन में उमंग, मन में तरंग
बारिश के संग नाचूँ मैं भी
कल्पना की नदी में बहती
एक अनकही सी राग सही