यहाँ एक कविता है बारिश के दिनों पर:

बादल की गोद में

धुंधले आसमान की चादर बिछी
बूँदें थिरकतीं, धरती को छुई

कच्ची सड़कों पर पानी बहता
हरियाली में नया संगीत गढ़ता

भीगी हुई ठंडी हवा में
कुछ यादें, कुछ सपने सजते

मोर की पुकार, पत्तों की सरसराहट
बारिश की मीठी-मीठी आवाज़ात