यहाँ एक कविता है बारिश के दिनों पर:

बादल की गोद में छुपी धरती

बूँदें गिरती, मन में उमंग भरती
रिमझिम संगीत, पत्तों पर नाचता
हर कोना, हर कली मुस्कुराता

सड़कें चमकीं, like बिखरे मोती
हवा में महकी गीली खुशबू की झोंकी
बारिश के इन पलों में, जैसे
जीवन फिर से जागता है मेरे पास