यहाँ एक कविता है:

लहरों का नृत्य

नीले विशाल आकाश में
समुद्र करता अपना खेल
उछल-कूद करती लहरें
बिखेरती अपना छंद-मंगल

कभी शांत, कभी उग्र सी
छूती आसमान के किनारे
नाचती हुई लहराती
अपनी अनंत कहानी सारे

चट्टानों से टकराती
फेन उगलती निर्मल जल
कभी मीठी, कभी तूफानी
समुद्र की यह अनोखी चाल