यहाँ एक कविता है:

मौन कमरे में बैठा हूँ

शब्द नहीं, सिर्फ सन्नाटा
दीवारें करती हैं मेरा इंतज़ार
किसी की आहट की आस में

कभी-कभी खिड़की से झाँकती
एक अकेली चिड़िया
मेरी तन्हाई को समझती

उँगलियाँ फिसलती हैं
खाली कागज़ पर
जैसे किसी खोई स्मृति को
ढूँढती हुई