तेरी याद के दीप जलते
सन्नाटे में मौन रिमझिम
बिखरे पल, मुरझाई स्मृतियाँ
दूर-दूर तक फैली तन्हाई
मेरे शब्द तुम्हारी राह देखते
जैसे पतझड़ की पत्ती, बहती
प्रेम की धारा, विरह की व्यथा
एक अधूरी, अनकही कथा
तेरी याद के दीप जलते
सन्नाटे में मौन रिमझिम
बिखरे पल, मुरझाई स्मृतियाँ
दूर-दूर तक फैली तन्हाई
मेरे शब्द तुम्हारी राह देखते
जैसे पतझड़ की पत्ती, बहती
प्रेम की धारा, विरह की व्यथा
एक अधूरी, अनकही कथा