यहाँ एक कविता है:

पुरानी याद के झरोखे

धूसर छाया में मुड़कर देखा
वो पुरानी गली, वो पुराना घर
जैसे समय ने रोक रखा हो सांस
हर पत्थर पर बिखरी हुई एक कहानी

स्मृतियाँ फिसलती हैं हथेली से
जैसे रेत के दाने, मुट्ठी से बाहर
कभी हँसी, कभी आँसू, कभी चुप्पी
अतीत के रंग इतने अनकहे

किसने कहा था कि यादें मर जाती हैं?
वे तो जीवित हैं, सांस लेती हैं
हर पल में छुपी, हर मोड़ पर खड़ी
अतीत मेरे साथ, मुझमें बसा