यहाँ एक कविता है:

सुबह की चाय

उजाले में डूबी, पलकों पर मंद मुस्कान
एक प्याला चाय, जैसे जीवन का अरमान

भाप उठती सी, विचारों को छूती हल्की
मसाले की महक, सुबह को करती मधुर और मलकी

चुस्की भर में छिपा, कई अनकहे राज़
थोड़ा अकेलापन, थोड़ा दिल का साज

चुपके से मेरे होंठों को छूती
जैसे कोई प्रेमिका, धीरे से मुस्कुराती