यहाँ एक कविता है "खामोशी" पर:

खामोशी

शब्दों के पार एक दुनिया है
जहाँ सन्नाटा बोलता है

मौन की गहराइयों में
छुपी हैं असीम बातें

कभी-कभी मेरी आँखें
खामोशी से भर जाती हैं

जैसे बादल अपनी चादर
मौन में बिछा जाते हैं