यहाँ एक कविता है "खामोशी" पर:

खामोशी

शब्दों के पार एक दुनिया बसी है
जहाँ मौन की गहराइयाँ कुछ कहती हैं

आँखों में छुपी एक अनकही दास्तान
मन की गुप्त भावनाओं का आलाप

सन्नाटे में भी कई संगीत छिपे
चुप्पी में भी कई अरमान जगे

धीरे-धीरे बढ़ती, फैलती खामोशी
अपने भीतर एक पूरी दुनिया लिए