यहाँ एक कविता है "खामोशी" पर:

खामोशी

शब्दों के पार एक दुनिया है
जहाँ सन्नाटा बोलता है

मौन की गहराइयों में
छुपी हैं हजार कहानियाँ

कान लगाओ, सुनोगे तो
पत्थर भी रो देंगे

धीरे-धीरे पिघलती
शब्दहीन आवाजें