खामोशी
शब्दों के बीच जो छुपी है अनकही
मन की गहराई में डूबी एक पहेली
सन्नाटे में बसती निःशब्द आवाज
कभी चीख, कभी आह, कभी मौन साज
धीरे-धीरे बढ़ती मौन की गहराई
हर मोड़ पर एक नई व्यथा समाई
शब्द नहीं, पर अर्थ बहुत कुछ कहते
मौन के आँचल में राज़ सजते
खामोशी
शब्दों के बीच जो छुपी है अनकही
मन की गहराई में डूबी एक पहेली
सन्नाटे में बसती निःशब्द आवाज
कभी चीख, कभी आह, कभी मौन साज
धीरे-धीरे बढ़ती मौन की गहराई
हर मोड़ पर एक नई व्यथा समाई
शब्द नहीं, पर अर्थ बहुत कुछ कहते
मौन के आँचल में राज़ सजते