मित्रता की डोर
जब सच्चे मन से मिलते हैं दो मन
बुनते हैं प्रेम के रंग-बिरंगे तान
कभी हँसते, कभी रोते साथ में
जीवन के हर मोड़ पर करते साथ में
न कोई शर्त, न कोई बंधन
सिर्फ भरोसे का अनमोल धन
छोटी-छोटी बातों में जो समाया
वही मित्रता का सच्चा अर्थ पाया
मित्रता की डोर
जब सच्चे मन से मिलते हैं दो मन
बुनते हैं प्रेम के रंग-बिरंगे तान
कभी हँसते, कभी रोते साथ में
जीवन के हर मोड़ पर करते साथ में
न कोई शर्त, न कोई बंधन
सिर्फ भरोसे का अनमोल धन
छोटी-छोटी बातों में जो समाया
वही मित्रता का सच्चा अर्थ पाया