मित्रता का रंग
जब सच की धारा बहती है दिलों में,
छू लेती है हर एक कोने को मन के
साथ खड़े होते हैं बिना शर्त, बिना डर
एक दूसरे के जैसे हों कई मन के पहर
कभी हँसी में, कभी आँसू में
सच्चे मित्र होते हैं हर पल मेरे पास
बिना किसी स्वार्थ के, बिना किसी बहाने
जुड़े हुए हमारे दिल के तार अनजाने