यहाँ एक कविता है मित्रता पर:

मित्रता का रंग

रिश्तों में जब कोई शब्द न रहे
आँखों की भाषा काफी है
तुम्हारी मुस्कान मेरी पनाह
तुम्हारा साथ मेरी सौगात

बिन बोले सब कुछ कह जाते हैं
दिल के तार जो झन-झन गाते हैं
कभी हँसते, कभी रो लेते हैं
एक-दूजे को संभाल लेते हैं