मित्रता का रंग
धुंधली यादों में, एक हाथ तुम्हारा
मेरी हथेली में फिर से जगमगाया
कभी हँसी, कभी आँसू, कभी चुप्पी साधे
हर पल में तुम रहे, बिना कुछ माँगे
दोस्ती की राहों पर, बिखरे हुए सपने
साथ चलते, रुकते, फिर से सजते
शब्दों से परे, एक अनकही भाषा
तुम्हारी मुस्कान में मेरा विश्वास जगा