बदलते रंग, बदलती धारा
हर ऋतु का अपना सौंदर्य न्यारा
वसंत में कोयल की कूक
गर्मी में धरती की धूक
बरसात में मोर की पुकार
शरद में पीपल की डगर सुखार
हरियाली, लाली, सुनहरी पट
हर रंग में छिपा प्रकृति का सत
कभी मधुर, कभी तीखी हवा
चलती रहे जीवन की अनुभवा
ऋतुएं चक्र में घूमती रहें
नई उम्मीद, नया संदेश देती रहें