यहाँ एक कविता है ऋतुओं पर:

ऋतुओं का संगीत

बसंत आती, रंग बिखेरती
कोयल की मीठी तान सजाती
हरी-हरी पत्तियाँ मुस्कुराती
नए जीवन का संदेश सुनाती

गर्मी दहकती, धरती जलाती
लू के झोंके मन को मचलाती
पीपल की छाँव में शरण मिलाती
प्यास बुझाती, सपने सजाती

मानसून गाती, बादल उमड़ते
झूमते बादल, बिजली चमकती
रिमझिम बूँदें धरती को छूती
हरियाली का जादू बुनती

शरद आती, सुनहरा पल लाती
सरसों के खेत में रंग बिखेरती
चाँदनी रात में मीठी हवा बहती
प्रकृति अपना श्रृंगार सजाती

शीत ऋतु में बर्फ़ की चादर
सफेद सपने बिछा जाती
ठंडी साँसें, गर्म चाय के साथ
जीवन की धुन को महकाती