यहाँ एक कविता है ऋतुओं पर:

ऋतुओं का नृत्य

बादल गाते, पवन झूमता
वसंत रंगों से सजता

गर्मी की दाह में तपती धरती
पीली पत्तियाँ, सूखी मरती

बरसात की फुहारें मनमोहक
बूँदें नाचती, मोर के बोल

शरद में सुनहरा सा सपना
पीला पता, सरसों का मेहना

सर्दी की चादर ओढ़े धरा
बर्फ़ में खिलता सफेद चंदा

ऋतुएँ आती, ऋतुएँ जाती
जीवन की धारा बहुत निराली