यहाँ एक कविता है ऋतुओं पर:

ऋतुओं का रंगमंच

बसंत आती, पल्लवों में हँसती
कोयल की मीठी धुन सजती
फूलों की रेशमी चादर बिछाती
नई उम्मीदों की बयार लाती

गर्मी दहकती, धरती को तपाती
लू के झोंके, पसीने छुड़ाती
पीपल की छाँव में शरण मिलती
प्यास भरी आँखों में नमी डलती

मानसून गरजता, बादल छाते
बूँदों के ताल पर नृत्य सजाते
हरियाली छा जाती चहुँ ओर
मोर नाचे, मन करे मनमोर

शरद की सुबह, कोमल प्रभात
ओस की बूँदें, सुनहरी बात
पीले पत्तों की मधुर कहानी
प्रकृति की अनोखी है यह जानी