शहर की रोशनी
चमक रही रातें, बिखरी हुई सपनों में
नीऑन लाइटें, धड़कती हुई सांसों में
बिल्डिंग्स के शीशे, चमकते हुए तारों से
सजी हुई सड़कें, जगमगाती हर पहर से
बिजली के तारों में लटकते हुए सपने
चुपके से जलते, मन के अधूरे पने
शहर जागता है, रोशनी के आगोश में
हर दिल धड़कता है, जीवन के उत्सव में