सुबह की चाय
उजाले में डूबी खिड़की,
भाप उठती प्याले से
चुस्की भर में छिपा है एक संसार
मेरी मुट्ठी में गर्माहट, मेरे दिल में बहार
पुरानी चुनरी ओढ़े मौसम,
चाय के साथ बैठी सावन की याद
एक घूँट, फिर एक घूँट
जैसे जीवन के हर पल को चखती
सुबह की चाय
उजाले में डूबी खिड़की,
भाप उठती प्याले से
चुस्की भर में छिपा है एक संसार
मेरी मुट्ठी में गर्माहट, मेरे दिल में बहार
पुरानी चुनरी ओढ़े मौसम,
चाय के साथ बैठी सावन की याद
एक घूँट, फिर एक घूँट
जैसे जीवन के हर पल को चखती